Friday, 3 November 2017
Monday, 30 October 2017
अपनो के लिये
मिलते जुलते रहा करो...
धार वक़्त की बड़ी प्रबल है,
इसमें लय से बहा करो,
जीवन कितना क्षणभंगुर है,
मिलते जुलते रहा करो।
यादों की भरपूर पोटली,
क्षणभर में न बिखर जाए,
दोस्तों की अनकही कहानी,
तुम भी थोड़ी कहा करो।
हँसते चेहरों के पीछे भी,
दर्द भरा हो सकता है,
यही सोच मन में रखकर के,
हाथ दोस्त का गहा करो।
सबके अपने-अपने दुःख हैं,
अपनी-अपनी पीड़ा है,
यारों के संग थोड़े से दुःख,
मिलजुल कर के सहा करो।
किसका साथ कहाँ तक होगा,
कौन भला कह सकता है,
मिलने के कुछ नए बहाने,
रचते-बुनते रहा करो।
मिलने जुलने से कुछ यादें,
फिर ताज़ा हो उठती हैं,
इसीलिए यारों नाहक भी,
मिलते जुलते रहा करो।
-अपनों को समर्पित...🎈🙏😊
धार वक़्त की बड़ी प्रबल है,
इसमें लय से बहा करो,
जीवन कितना क्षणभंगुर है,
मिलते जुलते रहा करो।
यादों की भरपूर पोटली,
क्षणभर में न बिखर जाए,
दोस्तों की अनकही कहानी,
तुम भी थोड़ी कहा करो।
हँसते चेहरों के पीछे भी,
दर्द भरा हो सकता है,
यही सोच मन में रखकर के,
हाथ दोस्त का गहा करो।
सबके अपने-अपने दुःख हैं,
अपनी-अपनी पीड़ा है,
यारों के संग थोड़े से दुःख,
मिलजुल कर के सहा करो।
किसका साथ कहाँ तक होगा,
कौन भला कह सकता है,
मिलने के कुछ नए बहाने,
रचते-बुनते रहा करो।
मिलने जुलने से कुछ यादें,
फिर ताज़ा हो उठती हैं,
इसीलिए यारों नाहक भी,
मिलते जुलते रहा करो।
-अपनों को समर्पित...🎈🙏😊
Saturday, 28 October 2017
मैं कोशिश में हूँ कि
मैं कोशिश में हूँ
कि वो मुझको मना ले
छोड़ के गया था
जिस चौखट पर
आ कर मुझको
उस से उठा ले
मेरी आवाज़ में अब
वो ज़ोर नहीं रहा
वो चले तो उसको
आवाज़ दे कर बुला ले
मैंने रफ्ता रफ्ता ज़िंदगी को
उधड़ते देखा है
कोई धागा ना बचा है
जो रफ़ू तो लगा ले
मैंने उसके अन्दाज़ में
जीने की कोशिश कर ली कई बार
अब क् या तरकीब करूँ
जो इस रिश्ते को बचा ले
आज सज़ा भी पूछे
किस जुर्म के लिए नवाज़ा गया है उसे
होंठ कुछ ना बोले ,लोग भी
बस आँखों से बयान ले
कि वो मुझको मना ले
छोड़ के गया था
जिस चौखट पर
आ कर मुझको
उस से उठा ले
मेरी आवाज़ में अब
वो ज़ोर नहीं रहा
वो चले तो उसको
आवाज़ दे कर बुला ले
मैंने रफ्ता रफ्ता ज़िंदगी को
उधड़ते देखा है
कोई धागा ना बचा है
जो रफ़ू तो लगा ले
मैंने उसके अन्दाज़ में
जीने की कोशिश कर ली कई बार
अब क् या तरकीब करूँ
जो इस रिश्ते को बचा ले
आज सज़ा भी पूछे
किस जुर्म के लिए नवाज़ा गया है उसे
होंठ कुछ ना बोले ,लोग भी
बस आँखों से बयान ले
"डफोळ नहीं हुशीय़ार "
"डफोळ नहीं हुशीय़ार "
एक डोकरो गाव जावे हों ! रास्त में एक जवानं रों सागो हुयग्यो !जवानं बोल्यों बाबा आपा रों गाव चार कोश हे ! दो कोश थे म्हारे खादहे बेठज्या अर दो कोश हु थारे खान्द्ध बेठज्यासू तों रस्तो सोरों पारर हुयज्यासी ! डोकरो बोल्यों के बेटा तु तों जवानं हे पण में थारो भार कोनी सांभ स्कुं !
यू बाता कारता कारता रस्ता में एक नाळो देख डोकरो आपरी फाटयोड़ी पगरखया हाथ में ले लि ,पण जवानं तो आपरी नुंवी जूत्या पेहरेयोड़ी राखी अर नाळो पारर क्रर लियो ! डोकरो मन में समझयों क ओँ तों डफोळ हे जको जूत्या पाणी में भीजोऔर खराब कर लि !
इताक में दोंन्यो जणँ गाव पुग्गया ! डोकरो हाथ रा ईशारा सू बतायो क बों म्हारो घर हे ! जवानं एक काकरो हाथ में लियो अर जोर सू कीवाड़ माथे फेंक्यो ही ! डोकरा रीं बेटी घर रों आडोखोल्यो ! जवानं पिवण ने पानी मांग्यो ! छोरी घर सू पाणी ल्याई ,जणा जवानं पुछयों क पाणी काचो हे क पाको !
छोरी बोली क पाणी हाल काचो ही हे ! डोकरो रस्ता में जवानं सू हुई सगळी बाता आपरी बेटी ने बताई अर कहयों क ओँ छोरो तों सफा डफोळ ह , तु ईण रीं बाता में ना आईयो !
छोरी बोली क नहीं बाबा ओँ जवानं डफोंळ कोनी घणो हुनशियार ह ! डोकरो बोल्यों बेटी किया ! छोरी बोली ओँ थाने कहयो क दोय कोश म्हे थारे माथेबेठु अर दोय कोश थे मारे माथह बेठौ ! मतलब दोय कोश थे बाता करों अर दों कोश ओँ बाता करेला !
इता में रस्तो पारर हुय जावेला ! रस्ता में पाणणी रा नाळा ने देख ओँ जूत्या कोनी खोली आ भी समझदारी री बात हे ओँ आपरी जानं की कीमत ने जूत्या सू बतती मानी ही ! अर ओँ जूत्या ने हाथ में कोनी लि ओँ थींक क्रयो ! पाणी में निच काँच कों टूकड़ो,भाटा या की ओर पग में लाग ज्याव या जहरिलो ज़िव ज़िनावर काट ज्याव ईण वास्ते ओँ जूत्या सू ज्यादा आपरी रक्षा रीं बात सोची !
अर जूत्या पेहरया ही पाणी रा नाळा ने पारर क्रयो ! ओँ काकरो आडा माथे फैक्यो ऊण टेम म्हे सिनानं करही ! काकरा री लागया सू आडा री आवाज सूण म्हे समझ गी क कोई कीवाड़ कन्ने आयो हे ईण सू म्हे फटाफट कपड़ा पहरया अर आडो खोल्ल दियो ! ईण सू थाने उडीकणो कोनि पड़यो !
ओँ म्हने पुछयों पाणी काचो हे .....मतलब म्हे क्वारी हु या प्ररणीज्योड़ी हु ! म्हे बोली पाणी काचो हे मतलब म्हे हाल ताही परणिज्योड़ी कोनी ! जवानं का सगळा लखण डफोंळपणा रा कोनी घणी हुशीय़ारकी रा हे ! आ सूण अर डोकरो आपरी बेटी री सगाई जवानं सू पक्की करण रीं तेवड़ लि ?
"रामो ही राम ओँ हुशीय़ारियो "
एक डोकरो गाव जावे हों ! रास्त में एक जवानं रों सागो हुयग्यो !जवानं बोल्यों बाबा आपा रों गाव चार कोश हे ! दो कोश थे म्हारे खादहे बेठज्या अर दो कोश हु थारे खान्द्ध बेठज्यासू तों रस्तो सोरों पारर हुयज्यासी ! डोकरो बोल्यों के बेटा तु तों जवानं हे पण में थारो भार कोनी सांभ स्कुं !
यू बाता कारता कारता रस्ता में एक नाळो देख डोकरो आपरी फाटयोड़ी पगरखया हाथ में ले लि ,पण जवानं तो आपरी नुंवी जूत्या पेहरेयोड़ी राखी अर नाळो पारर क्रर लियो ! डोकरो मन में समझयों क ओँ तों डफोळ हे जको जूत्या पाणी में भीजोऔर खराब कर लि !
इताक में दोंन्यो जणँ गाव पुग्गया ! डोकरो हाथ रा ईशारा सू बतायो क बों म्हारो घर हे ! जवानं एक काकरो हाथ में लियो अर जोर सू कीवाड़ माथे फेंक्यो ही ! डोकरा रीं बेटी घर रों आडोखोल्यो ! जवानं पिवण ने पानी मांग्यो ! छोरी घर सू पाणी ल्याई ,जणा जवानं पुछयों क पाणी काचो हे क पाको !
छोरी बोली क पाणी हाल काचो ही हे ! डोकरो रस्ता में जवानं सू हुई सगळी बाता आपरी बेटी ने बताई अर कहयों क ओँ छोरो तों सफा डफोळ ह , तु ईण रीं बाता में ना आईयो !
छोरी बोली क नहीं बाबा ओँ जवानं डफोंळ कोनी घणो हुनशियार ह ! डोकरो बोल्यों बेटी किया ! छोरी बोली ओँ थाने कहयो क दोय कोश म्हे थारे माथेबेठु अर दोय कोश थे मारे माथह बेठौ ! मतलब दोय कोश थे बाता करों अर दों कोश ओँ बाता करेला !
इता में रस्तो पारर हुय जावेला ! रस्ता में पाणणी रा नाळा ने देख ओँ जूत्या कोनी खोली आ भी समझदारी री बात हे ओँ आपरी जानं की कीमत ने जूत्या सू बतती मानी ही ! अर ओँ जूत्या ने हाथ में कोनी लि ओँ थींक क्रयो ! पाणी में निच काँच कों टूकड़ो,भाटा या की ओर पग में लाग ज्याव या जहरिलो ज़िव ज़िनावर काट ज्याव ईण वास्ते ओँ जूत्या सू ज्यादा आपरी रक्षा रीं बात सोची !
अर जूत्या पेहरया ही पाणी रा नाळा ने पारर क्रयो ! ओँ काकरो आडा माथे फैक्यो ऊण टेम म्हे सिनानं करही ! काकरा री लागया सू आडा री आवाज सूण म्हे समझ गी क कोई कीवाड़ कन्ने आयो हे ईण सू म्हे फटाफट कपड़ा पहरया अर आडो खोल्ल दियो ! ईण सू थाने उडीकणो कोनि पड़यो !
ओँ म्हने पुछयों पाणी काचो हे .....मतलब म्हे क्वारी हु या प्ररणीज्योड़ी हु ! म्हे बोली पाणी काचो हे मतलब म्हे हाल ताही परणिज्योड़ी कोनी ! जवानं का सगळा लखण डफोंळपणा रा कोनी घणी हुशीय़ारकी रा हे ! आ सूण अर डोकरो आपरी बेटी री सगाई जवानं सू पक्की करण रीं तेवड़ लि ?
"रामो ही राम ओँ हुशीय़ारियो "
Friday, 27 October 2017
दिल
नदी तो बहुत है यहाँ
बस पानी नही है,
जिंदगी बहुत है यहाँ
बस जिन्दगानी नही है।
कोरे कागज और कुछ
आड़ी तिरछी रेखाएं,
टूटे बिखरे शब्द, पर
कोई कहानी नही है।।
इज़हारे मोहब्बत रेत
और पेड़ो पे की हो,
फिर मिटायी न हो ,
ऐसी कोई जवानी नही है।
आग लगी नफरत की
गाँव, शहर की बस्ती में।
बुझाये तो बुझाये कैसे,
दिल है मगर आंख में
पानी नही है।।
आंख में पानी नही है....
बस पानी नही है,
जिंदगी बहुत है यहाँ
बस जिन्दगानी नही है।
कोरे कागज और कुछ
आड़ी तिरछी रेखाएं,
टूटे बिखरे शब्द, पर
कोई कहानी नही है।।
इज़हारे मोहब्बत रेत
और पेड़ो पे की हो,
फिर मिटायी न हो ,
ऐसी कोई जवानी नही है।
आग लगी नफरत की
गाँव, शहर की बस्ती में।
बुझाये तो बुझाये कैसे,
दिल है मगर आंख में
पानी नही है।।
आंख में पानी नही है....
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